مبارك أيسار، الفنان المجدد

  • الطيب أمگرود //

(…)
ⵡⴰⵅⵅⴰ ⵉⵜⵜⵔⵙ ⵓⵊⵏⵡⵉ ⴼ ⵓⵎⴳⴳⵕⴹ
وَاخَّا إيتّْرْسْ أوجْنْوي فْ أومْگّْرْضْ
ⴰⵡⴰⵍ ⵏ ⴽⴽⵉ ⵏⵏⵉⵖ ⵜ ⵓⵔ ⵔⴰⴷ ⴷ ⴳⵉⵙ ⵏⴳⴳⵯⵉⵣ
أوَالْ نْكِّي نِّيغْ تْ أورْ رادْ دْ گيسْ نْگِّيزْ
ⵉⵖ ⵏⵉⵜ ⵏⵎⵎⵓⵜ ⵜⴰⵛⵛⴰⵊⵉⵄⵜ ⵏⴼⵍ ⵜⵜ ⴷ

إيغْ نيتْ نْمُّوتْ تاشَّاجيعْتْ نْفْلْ تِّي دْ
هذه الأبيات، وهي من النص الشعري لرائعة من روائعه الكثيرة، تلخص شخصية الرايس مبارك أيسار المقدام الشجاع الصادق الكريم، واحد ممن حلق عاليا في سماء تيرويسا، وذاع صيته في كل الأصقاع، بعد أن كان ذاك الطفل الذي استهزأ منه أقرانه من أبناء دوار تابولعوانت وهو يحمل آلته الأولى المصنوعة بأنامله الصغيرة.

من أدوات بسيطة، صنع الطفل مبارك ربابه، وشرع صغيرا في محاولات تقفي مواقع نوتات المقام الأمازيغي الخماسي بأصابعه الصغيرة على وتر ربابه الوحيد، جمهوره ومشجعته والدته. سيواصل تعقب النغمات نغما نغا نوتة نوتة، ويقلد رواد تيرويسا إبان طفولته دون أن يعلم أن القدر سيسوق إليه كبير الروايس الحاج محمد ألبنسير ليمسح على رأسه مصفقا ومشجعا ومحفزا له على المضي في درب الفن الأمازيغي الخالد تيرويسا.

منح مبارك هموش (1952-2009) المعروف فنيا بالرايس مبارك أيسار، نسبة إلى قبيلته إداويسارن في إيحاحان، صوتا هادئا وملكة موسيقية صنعت التغيير في أغنية الروايس، وأبدع أيسار عشرات الألحان العذبة والقطع الموسيقية التي مازال المتلقون يطربون لها إلى اليوم بعد مضي قرابة خمسة عشرة سنة على وفاته.

ففي الواحد والثلاثين من ماي 2009 اختار أيسار أن يغادرنا إلى الأبد بعد أن بلغت شهرته كل الأصقاع، وأطرب الشغوفين بالطرب الجميل، ومن المفارقات العجيبة أن أيسار يتواجد جمهوره، عكس أغلب الروايس، خارج المناطق الناطقة بتشلحيت، وهو من الفنانين القلائل الذين خرقوا القاعدة وتمكنوا من ضم فئات عريضة من خارج المناطق التي تعشق تيرويسا لجمهوره العريض.

لقد أهل أيسار لتلك المرتبة وللشهرة ثقافته الفنية، وصوته الفريد وبراعته في التلحين والأداء، وكونه أول من استطاع المزاوجة بين عدة مقامات موسيقية وتعدد الجمل والانتقالات الموسيقية داخل نفس اللحن، وتعدد أبحر الشعر في نفس القطعة الغنائية تبعا لتعدد الألحان، عكس مجايليه وسابقيه من الروايس الذين اتسمت أعمالهم بالجملة الموسيقية الواحدة والوزن الشعري الواحد، وبرع أيسار في الهدوء والشجن اللذان ميزا ألحانه وجعلتها تلج القلوب من غير استئذان، فضلا عن براعته في اختيار المواضيع باحترافية عالية، والإيقاعات المتقنة، فقدم للجمهور أعذب الألحان وأرقى الكلمات، فاستحق بذلك أن يوسم بأحد وأكبر مجددي أغنية الروايس.

كما تميز أيسار أيضا بالفرادة في أخلاقه الرفيعة وتشبته بقيم وعادات وتقاليد الأمازيغ، إذ يحكي من عايشوه أو نزلوا عليه ضيوفا أو استضافوه… عن كرمه المنقطع النظير، وصرامته وصدقه وميله الشديد للاستقامة. ويذكر أحد من زاروه في بيته بالدشيرة ضواحي إنزگان، أنه توجه لبيته ومن معه قصد دعوته ليحيي حفلا عائليا بمنطقتهم، استقبلهم ببشاشته المعهودة، وقادهم مرحبا نحو غرفة الضيوف، وقال كعادة الأمازيغ ” بْرّْكاتْ، گَّاوراتْ إيرْبِّي هاتي أورْ را نبْدْرْ والو أرْدْ نْسو أتايْ فادّْ أَ نْساوْلْ” ومؤداه الترحيب بهم ودعوتهم لإكرامهم قبل إثارة موضوع زيارتهم.

كان بيت عائلة أيسار في عاصمة الفن الأمازيغي الدشيرة، كما يحكي كل من زاروه يوحي لك وكأنك وسط إداويسارن، وكانت تفاصيل إكرامه الضيف وكأنك في عمق إيحاحان، ولا يشرع في التحدث في أمور مهنته كرايس إلا بعد أن يرفع آخر إناء ويعطر الضيوف فيقول ” أوا باسم الله إيربي، ماد أون د إيگان أضار”.

وكانت حفلات أيسار محجا لكل العشاق من كل الأصقاع، وقضى عمره الفني في خدمة فن تيرويسا والفن الأمازيغي عموما، وتسلق سلم الشهرة والمجد لأربعة عقود، ليغادرنا وقد خلف وراءه ريبرتوارا غنيا ألحانا ونصوصا وأداء وعزفا يتداول ويحظى بحب وشغف الجمهور، ويلهم الفنانين الصاعدين إلى اليوم، وسيرة غنية عنوانها النبل والشهامة والقيم والأخلاق الأمازيغية العالية والنبيلة.

وتخرج من مدرسة أيسار الفنية وتشرب أخلاقه وكرمه كبار الفنانين، نذكر منهم تلميذه الوفي النجيب الرايس الحسين أمراكشي، الذي تتلمذ على يديه، وتفنن وجدد وأبدع، وبلغ الشهرة سريعا بدءا من سنة 1990، وبكى أستاذه طريحا للفراش سنة 1998 في أغنية “إيعْزَّا باهْرا يانْ إيگان لْجيدْ”، التي نعى فيها من فقدتهم الساحة الفنية الأمازيغية في تلك السنوات، فذكر سعيد أشتوك وعمر واهروش ومحمد أوتاولوكلت وحسن بونصير… وهو يقول:

ⵉⵏⵏⴰ ⵉⵢⵉ ⴷⴰⵖ ⵓⵎⴷⴷⴰⴽⵯⵍ ⵖ ⵜⵜⵉⵍⵉⴼⵓⵏ, ⴰⵔⴰ ⴰⵎⴰⵔⴳ ⵏ ⵍⵊⴷⵉⴷ
ⵉⵕⴱⴱⵉ ⴰ ⵛⵜⵓⴽⴰⵎⵓⵣⵉⴽ ⵚⵕⴼ ⴰⵙ ⵍⴽⴰⵚⵉⵟ, ⵙⵔⴱⵉ ⵙⵎⴷ ⴰⵙ ⵍⵖⵕⴹ
(…)
ⴰⴷ ⴽⵓⵍⵍⵓ ⵉⴳ ⵕⴱⴱⵉ ⵖ ⵍⵊⵏⵜ ⵡⵉⵍⵍⵉ ⵃⵏⵏⴰⵏⵉⵏ, ⵉⴼⵓⴽⴽⵓ ⵢⵉ ⵖ ⴷⴷⵏⵓⴱ
ⵏⵎⴹⵍ ⵏⵏ ⴰⵛⵜⵓⴽ ⵙⵄⵉⴷ ⵓⵔ ⴼⵍⵍⴰⵙ ⵉⵎⵟⵉⵍ, ⵏⵎⴹⵍ ⵏⵏ ⴷⴰⵖ ⵍⵃⴰⵊⵊ
ⵀⴰⵏⵏ ⵍⵃⴰⵊⵊ ⵄⵓⵎⴰⵕ ⵉⴷⴷⴰ ⴰⵖ ⴽⵓⵍⵍⵓ ⵙⵙⴰⵍⵍⴰⵏ ⴰⵖ, ⵉⴱⴱⵉ ⵡⴰⵀⵔⵓⵛ ⵍⵇⵍⴱ
ⵀⴰⵏⵏ ⵓ ⵜⴰⵡⵍⵓⴽⵍⵜ ⵉⴷⴷⴰ ⵙ ⵜⵉⵍⵍⴰⵙ ⵏ ⵡⴰⴽⴰⵍ, ⵍⵃⴰⵊⵊ ⵎⵓⵃⵎⵎⴰⴷ
ⴷⴰⴷⴷⴰ ⵃⴰⵙⴰⵏ ⵓ ⴱⵓⵏⵚⵉⵕ ⴽⵛⵎⵏ ⴰⴽⴰⵍ, ⵡⴰⵍⴰⵢⵏⵏⵉ ⵉⴼⵍ ⴷ ⵍⵄⵣⵣ
ⵓ ⵟⵟⴰⵢⵢⵉⴱ ⵎⵓⵃⵎⵎⴰⴷ ⴰⵛⵜⵓⴽ ⴽⵛⵎⵏ ⴰⴽⴰⵍ, ⵉⴳⴰ ⵕⵕⴰⵢⵚ , ⵉⴳ ⵍⵊⵉⴷ
ⴰⵍⵍⴰⵀ ⵉⵕⵃⵎ ⴽ ⴰ ⵊⵓⵊⴰⵢⵏ ⵉⵙⵙⵏ ⴽⵯⵏ ⴽⵓ ⵢⴰⵏ, ⴰⴷ ⴷⵉⴽ ⵏⴷⵄⵓ ⵍⵉⵍⵍⴰⵀ
ⴰⵍⵍⴰⵀ ⵉⵕⵃⵎ ⵡⴰⵍⴰ ⴱⵓⵕⵃⵉⵎ ⵓⵍⴰ ⴱⵓⵊⵎⵄⴰ ⵡⴰⵍⴰ ⴰⵡⵔⵉⴽ ⵃⵎⴰⴷ
ⵏⴽⴽⵉ ⵏⵉⵜ ⴰⵙⵙ ⵏⵏⴰ ⴷ ⵜⵕⵓⵃ ⵜⵡⴰⵍⴰ ⵏⵏⴰⵖ, ⵔⴰⴷ ⴷ ⵏⴼⵍ ⵔⵔⵉⴱⴰⴱ
(…)
ⵎⵓⵏⴰⵜ ⴰ ⵕⵕⵡⴰⵢⵚ ⴼ ⵕⴱⴱⵉ ⵎⵛⴰⵔⴰⴽⴰⵜ ⵍⵅⵉⵔ, ⵍⵄⵉⴱ ⴰⴷ ⵉⴳ ⴰⵎⴰⵥⵓⵥ
ⵢⴰⵏ ⵉⵎⵕⵉⴹⵏ ⵜⵜⴰⴳⴳⵯⴰ ⵏⵏ ⵙⵉⵙ ⵍⵍⵉⵖ ⵉⵙⵓⵍ, ⵉⵖ ⵉⵎⵎⵓⵜ ⵖⴰⵔ ⵓⵔⵔⵉ ⴷ
ⵉⵍⵍⴰ ⵢⴰⵏ ⵓⴳⵔⵣⴰⵎ ⵉⴹⵕ ⵖ ⵡⴰⵟⵟⴰⵏ ⵉⵅⴰⵚⵚⴰ ⴰⵖ, ⴰⴷ ⴽⵓⵍⵍⵓ ⴷⵉⵙ ⵏⴱⵉⴷⴷ
ⵍⵍⵉⵖ ⵉⵚⵃⴰ ⵡⴰⴳⵔⵣⴰⵎ ⵎⴰ ⴰⴷ ⵜ ⴰⴽⴽⵯ ⵉⵙⵙⵉⵃⵍⵏ, ⴰⵔ ⵉⴽⴽⴰⵜ ⵖⴰⵔ ⵍⵇⵍⴱ
ⵕⴱⴱⵉ ⵙ ⵍⵄⴼⵓ ⵀⴰⵏⵏ ⵎⴱⴰⵕⴽ ⴰⵢⵢⵉⵙⴰⵔ ⵏⵔⴰ ⵜ, ⴰⴷ ⴷ ⵉⴼⴼⵓⵖ ⵙ ⵓⴱⴰⵔⴰⵣ
ⵙ ⵉⵃⴰⵃⴰⵏ ⴰⴳⴳⵯⴰⵜ ⴷ ⴷ ⴰⴽⴽⵯ ⵙ ⵍⴼⵏⵏⴰⵏ ⵏⵏⴰⵖ, ⵏⴱⵉⴷⴷ ⴰⵔⴽⵉⵖ ⵉⴱⵉⴷⴷ
ⴰⴷ ⵓⵔ ⵏⵜⵜⵓ ⵍⵍⵉⵖ ⴰⵔ ⴷ ⵉⵜⵜⵍⵓⵇ ⵉ ⵍⵉⵛⴰⵕⴰⵜ, ⴰⵔ ⵉⴽⴽⴰⵜ ⵙ ⵍⴱⴰⵕⵓⴹ
ⴰⵍⵍⴰⵀ ⵉⵕⵃⵎ ⵢⴰⵏ ⵉⴷⴷⴰⵏ ⵙ ⴰⵎⵎⴰⵙ ⵏ ⵡⴰⴽⴰⵍ, ⵢⴰⵣⵏ ⴷ ⵍⵄⴼⵓ ⵉ ⵖⵡⵉⴷ

ولا يتوقف أمراكشي عن الإشادة بالرجل إلى اليوم، وذكر أفضاله عليه، وبكاه ناعيا فيه الفنان الإنسان سنة 2009 لعموم أفراد عائلته وجمهوره العريض في نص مؤثر نعى فيه الأسماء الأخرى التي ودعت الساحة الفنية إذ ذاك:

ⴰⵡⵏ ⵙⵙⵕⵃⵎⵖ ⴰ ⵍⵎⵓⵃⵉⴱⴱ ⵏ ⵉⵎⵓⵔⵉⴳ ⵕⵕⵡⴰⵢⵚ ⵡⵉⵍⵍⵉ ⵍⴰⵃ
ⵀⴰ ⴷ ⵢⴰⵏ ⴽⴽⵓⵥ ⵉⵜⵔⴰⵏ ⵏ ⵍⵀⴰⵡⴰ ⵎⵎⵓⴷⴷⴰⵏ ⵙ ⴰⵎⵎⴰⵙ ⵏ ⵡⴰⴽⴰⵍ
ⵊⴰⵎⵄ ⵍⵃⴰⵎⵉⴷⵉ ⵓⵍⴰ ⵊⴰⵎⵄ ⴰⵣⵉⴽⵉ ⵀⴰⵏⵏ ⴽⵓⵍⵓ ⵜⵏ ⵙⴰⴼⵔⵏ
ⵢⴰⴼⵓⴹ ⴰⵖ ⵎⴱⴰⵕⴽ ⵉⴼⵍ ⴷ ⵖ ⵓⴱⴰⵔⴰⵣ ⵎⵙⴽⵉⵏ ⵍⵎⴰⴽⴰⵏ ⵏⵏⵙ
ⴰⴷ ⴽⵯ ⵉⵕⵃⵎ ⵕⴱⴱⴱⵉ ⴰ ⵍⴼⵏⵏⴰⵏ ⵀⴰⵏⵏ ⵍⵇⵍⴱ ⴰⵔ ⴼⵍⵍⴰⵜⵓⵏ ⴰⵍⵍⴰⵏ
ⵎⵔⴰⴷ ⵜⵓⴳⴳⵉⵜ ⵙ ⵍⵀⵎⵎ ⴷ ⵓⵃⵕⵕⵉⴳ ⵏⵏⴽ ⵎⴰⵏⵉ ⴽⵓⵍⵍⵓ ⵢⵓⵜ
ⵍⵎⵓⵜ ⵍⴼⵕⴹ ⴰⴷ ⵜⴳⴰ ⵎⴰⵛⵛ ⵀⴰⵏⵏ ⵍⵇⵍⴱ ⴰⴷ ⵓⵔ ⵉⵜⵜⵓⵏ ⴰⵢⵢⵉⵙⴰⵔ
ⴰⵔ ⴷ ⵏⴽⵜⵜⵉ ⵢⴰⵏ ⵡⴰⵙⵙ ⵏⵅⴷⵎ ⴷⵉⵙ ⵏⴳⴰⵡⵔ ⴰⵔ ⴰⵖ ⵉⵜⵜⵏⵚⴰⵃ
ⵉⵏⵏⴰ ⵉⵢⵉ ⵀⴰⵏⵏ ⴰ ⵍⵃⵓⵙⴰⵢⵏ ⵉⵎⵓⵔⵉⴳ ⴰ ⵉⵔⴰ ⵏⵉⵜ ⵍⵢⴰⵇⵉⵏ
ⵣⴰⵢⴷ ⴰⵡⴷⴷⵉ ⴰ ⴰⵀⵡⴰⵡⵉ ⴰⴷ ⴽⵯⵏ ⵉⵕⵃⵎ ⵕⴱⴱⵉ ⵖⴼⵔⵏ ⴰⴽ ⵉⵙⵎⵃ ⴰⴽ
ⵡⴰⵍⵍⵉ ⵖ ⵉⵍⵍⴰ ⵙⵙⵉⵄⵔ ⵉⵖ ⵉⴳⴳⵔ ⵉ ⵔⵔⵉⴱⴰⴱ ⵏⵏⵙ ⵉⴼⴼⵉ ⵜⴰⵖⵓⵢⵢⵉⵜ
ⵢⵓⵜ ⵙ ⵓⴳⴰⵢⵢⵓ ⵍⵓⵃⵏ ⴰⵎⴰⵔⴳ ⵉⵙⵎⴷⵓⴷⵉ ⴽⵔⴰ ⴰⵙ ⵉⵙⵍⵍⴰⵏ
ⵎⴰⵏⵉⴷ ⵓⵔ ⵉⴽⴽⵉ, ⵎⴰⵏⵉ ⵖ ⵓⵔ ⵉⵀⴹⵕ, ⴽⵓⵍⵍⵓ ⴷⴷⵓⵏⵢⴰ ⵉⵙⵜⴰⵔⴰ ⵜⵏⵜ
ⵜⴰⵙⴰ ⵉⵏⵓ ⴷ ⵡⵓⵍ ⵉⵏⵓ ⵕⴱⴱⵉ ⴰⴷ ⵏⵏ ⴳⵉⵜⵓⵏ ⵉⴳⴰⵏ ⵡⴰⵍⵍⵉ ⴼ ⵏⵙⴰⵡⴰⵍ
ⴳⵉⵖ ⵍⵎⵓⵃⵉⴱⴱ ⵏ ⵍⵀⴰⵡⴰ ⵏⵏⵙ ⵉⵎⵓⵔⵉⴳ ⵏⵏⵙ ⴰⴷ ⵖ ⵜⵜⵄⵍⵍⴰⵎⴰⵖ
ⵉⵖ ⴷⵉⵙ ⵏⵎⵓⵏ ⴰⵎⵥⴰⵖ ⴰⵙⵏ ⵔⵔⵉⴱⴰⴱ ⵎⵙⴽⵉⵏ ⵓⵔ ⴰⵖ ⵉⴼⴼⴰⵍ
ⵉⵖ ⵔⴰⴷ ⴰⵖ ⵉⵅⵍⵍⵚ, ⵉⵅⵍⵍⵚ ⵉⵢⵉ ⵍⵉⵊⴰⵕⵟ ⵉⵏⵓ ⵙⵙⵓⴼⵓⵏ ⴰⵖ
ⵉⵖ ⵙⵍⵍⴰⵖ ⵉ ⵜⴰⵍⵍⴰⵖⴰⵜ ⵏⵏⵙ ⴳⵉⵏ ⵉⵢⵉ ⵣⵓ ⵉⵖ ⵉⵙⵓⵍ ⵓⵔ ⵉⵎⵎⵓⵜ
ⵍⵍⵉⵖ ⵙⵓⵍ ⵉⵙⵓⵍ ⵉⵎⵕⵉⴹ, ⵏⴱⴷⵔ ⵜ, ⵉⵍⵍⴰ ⴷⴷⵉⵙⴽ ⴰⵏⵏ ⵉⵙⵙⵏ ⴽⵓ ⵢⴰⵏ
ⵖⵉⵍⵍⵉ ⵖ ⵏⵏⵉⵖ ⵉ ⵢⵉⵃⴰⵃⴰⵏ ⴰⴳⴳⵯⴰⵜ ⴷ ⴰⴽⴽⵯ ⵙ ⵍⴼⵏⵏⴰⵏ ⵏⵏⴰⵖ
ⵀⴰⵏⵏ ⴰⵡⴷⴷⵉ ⴰ ⵕⵕⴰⵢⵚ ⵏⵏⴰⵖ ⵢⴰⵏ ⵓⵔ ⵔⴰⴷ ⴷ ⵉⵎⵎⵖⵉ ⵖ ⵍⵎⴰⴽⴰⵏ ⵏⵏⴽ

فهل ستجود المناطق المصدرة لتيرويسا بفنانين آخرين كبارا من عيار أيسار وتلامذته ومجايليه وسابقيه؟


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